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ग्रीष्म काल आहार

ग्रीष्म काल में सूर्य की किरणें धरती के निकट और सीधे पड़ती है। इससे शरीर से पसीने का निकास विशेष रूप से होता है। साथ ही खून में मिले सोडियम क्लोराइड (NaCl)आदि तत्व शरीर से निःसरित हो जाते हैं जिससे कि थकान और खून में गाड़ापन की अवस्था उत्पन्न हो जाती है । जहां परिसरीय रक्त परिभ्रमण (periferal blood circulation) की मात्रा बढ़ जाती है, वहीं आंत्रप्रणाली/ आहरप्रनाली में शैथिल्य आ जाता है। परिणामस्वरूप पाचन क्रिया कम होकर पाचन के विकार वमन, दस्त, उदरशूल आदि अनेक उपद्रव हो सकते हैं । शरीर से बार-बार पसीना निकलकर मूत्रकृच्छता, मूर्च्छा, दाह जैसे विकार होने में भी देर नहीं लगती। लू लगने से मस्तिष्क स्थित ताप नियन्त्रण केन्द्र के विकृत हो जाने से पसीना निकलना बंद होकर, ताप नियन्त्रण से अधिक हो सकता है। इन दिनों विशूचिका( dysentry) भी एक मारक रोग के रूप में हो सकता है। अतः गरमी से होने वाली भयंकर विकृतियों से बचने के लिए ही हमें अधिक सावधान रहना चाहिए । ग्रीष्म में *रिक्तोदर कभी न रहें । *जहां तक हो सके सुबह का नाश्ता करके ही बाहर निकले।


*भूख लगते ही भोजन करलें।
*दिन के नौ, दस बजे के बाद हर हालत में ठण्डा जल पीकर ही बाहर निकलें।ऐसा करने से रिक्त आंतों में होने वाला दोषाणु प्रकोप ( infection)और लू लगना, दोनों के लिये रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो जाती है।
* उबालकर ठण्डा किया जल पीवें ।
*हरी और ताजी सब्जियां इन दिनों खूब चाहिए।
* मूंग जैसी हल्की दालें खाई जा सकती है।
* चावल का प्रयोग ग्रीष्म ऋतु में अवश्य करना चाहिए.
* दुष्पाच्य अन्न से कुछ हद तक बचा जाना चाइए। *पपीता, लौकी, ककड़ी, टिंडा,तुरई जैसी हरी सब्जियाँ विशेष लाभप्रद हैं। *नाश्ते के रूप में जौ को भूनकर पीसकर बनाया सत्तू, शक्कर और जल मिलाकर खाना बहुत ही हितकर है। इसे तृष्णा, अतृप्ति, थकान आदि अनेक लक्षण नहीं सताते । *कच्ची ककड़ी, पके टमाटर, नींबू, नमक और काली मिर्च तथा भुना जीरा पीसकर मिलाने से बनाया हुआ सलाद खाना गर्मियों के दिनों में बड़ा रुचिकर और स्वास्थ्यवर्धक रहता है। *फलों में आम, सन्तरा, आलू बुखारा, लीची, तरबूज और तरबूज आदि फलों का खाना अच्छा रहता है।
*कच्चे आम को कूटकर शक्कर (कच्ची शक्कर) मे बनाया शरबत हर दूसरे तीसरे दिन पीने से लू लगना, दाह का सताना आदि से सुरक्षा मिलती है । *आलूबुखारा का शर्बत ताजा बनाकर पीना भी दाह ओर गरमी से मुक्ति दिलाता है। यह अच्छा तृषानाशक और तृप्तिदायक पेय है।
*तरबूज और ककड़ी के बीजों के साथ, बादाम पीसकर बनाई ठंडाई भी इन दिनों तृषा तथा दाह को दूर करने वाली रहती है।
*पुदीन का रस निकालकर शक्कर डालकर पीने से ह्रल्लास, आध्मान,और कुपचन में लाभप्रद है।

SWARNA PRASHAN

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