C.R.I.L.I.

Full form of “C.R.I.L.I.” is

1.Concentration of mind
2.Resistance power
3.lntelligent quotient
4. Luminating of the face
5. Immunity power

In Kashyap samhita sutra sthana acharya said that..

“सुवर्णप्राशन ही एतत् मेधाग्निबलवर्धनम, आयुष्यं मंगलं पुण्यं वृष्यं ग्रहापहं, मासात परम मेधावी व्यधिर्भिर्न च घृष्यते, षड्भिर्माषायं श्रुतधरं सुवर्णप्राशनद भवेत्।”

According to this reference of classics i will describe it soon with intersting articles and facts…

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स्वर्ण की रामायण में महत्ता

स्वर्ण की रामायण में महत्ता

 

                         जब रामायण को पढ़ना शुरू करते हैं तो सोने की महत्ता का ज्ञान शुरू से ही होने लग जाता है,जैसे- यूं कहें कि जानकी यानी सीता का उद्गम धरती से उस समय हुआ जब श्री जनक सोने के हल द्वारा धरती को जोत रहे थे,  बाद में हमने सुना कि सीता ने भी सोने के हिरण का शिकार करने को ही श्री राम को कहा था जो जंगल में उन्हें दिखाई दिया था,  जब सीता जी श्री राम के साथ बनवास तो जा रही थी तो उन्हें स्वर्ण आभूषण उतारने के लिए बोला गया जिसे की प्रजा वासियों ने अशुभकारी, अमंगलकारी संकेत माना था क्योंकि उनके अनुसार आज भी घर में पुत्री या बहू का स्वर्ण आभूषण उतारा जाना अमंगलकारी है। इसी तरह  जब सीता जी का हरण रावण द्वारा किया गया तब उन्होंने अपने आभूषणों को जगह-जगह गिरा (जिन्हें बाद में वानरों ने एक-एक करके इन्हें इकट्ठा किया) कर उस स्थान की ओर इंगित किया था, जहां उन्हें ले जाया जा रहा था और वह जगह थी-  सोने की लंका

                         इसी तरह बाद में जब सीता जी को लोगों के कहने पर श्री रामजी ने छोड़ दिया और यज्ञ करवाने की बारी आई तो, उनके साथ सीता जी की सोने की मूर्ति को वहां रखा गया, जिनको कनक सीता या कनक जानकी कहा गया था क्योंकि श्री राम को सीता जी की शुद्धता पर कोई शक नहीं था और हमें तो सीता जी और स्वर्ण दोनों की शुद्धता, मंगलकारीता एवं कर्मुकता पर लेश मात्र भी संदेह नहीं है। अब तक स्वर्ण की चमत्कारी कार्मुक्ता को स्वर्णप्राशन के रूप में हम लगभग 28000 से अधिक खुराक बच्चों को खिलाकर आजमा चुके हैं। स्वस्थ बच्चे राष्ट्रीय गौरव हैं उनकी ताकत और प्रतिरक्षा (immunity & resistance power) बनाए रखना सब के लिए चुनौती है। 

                         भारतीय परंपरा एवं आयुर्वेद में स्वर्ण प्राशन एक अनोखा टीकाकरण कार्यक्रम है।सामाजिक कार्य के रूप में मैं डॉ. अरुण भाटी इसके साथ जुड़ा हुआ हूं। वर्तमान समय के लिए हमारे द्वारा स्वर्ण प्राशन का एक अद्भुत तरीका विकसित किया गया है। हमने देश के विभिन्न सुवर्णप्राशन करवा रहे केन्द्रों का सर्वेक्षण किया और हमें सुवर्णप्राशन के उत्साहवर्धक परिणाम मिले।

                           हमने पाया कि सुवर्णप्राशन करवाए गए बच्चों में का C.R.I.L.I. का उद्भव अन्य बच्चों की तुलना में अधिक शीघ्रता से होता है। ( C.R.I.L.I. के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप मेरी वेबसाइट drarunbhati.com पर देखें) हम 2014 से ही बड़े पैमाने पर स्वर्ण प्राशन संस्कार कार्यक्रम कर रहे हैं और आपको इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करते हैं।

 

 

कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में आयुर्वेद की पेशकश

कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में आयुर्वेद को क्या पेशकश करनी है

कोरोनोवायरस (COVID-19) के प्रकोप के कारण दुनिया भर में फैली सभी निराशा के बीच, जिसने अब एक लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया है और दुनिया भर में लगभग 3,500 व्यक्तियों को मार डाला है, हर कोई निवारक उपायों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, I

जैसे-जैसे लोग खुद को बचाए रखने के लिए दौड़ते हैं, आयुर्वेद में कहा गया है  कि आंवला, गिलोय, शिलाजीत और नीम जैसी औषधीय जड़ी-बूटियां प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक हैं जो घातक वायरस से लड़ने में महत्वपूर्ण हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, च्यवनप्राश का एक बड़ा चमचा प्रतिदिन खाने से प्रतिरक्षा में वृद्धि होती है और यह वायरस के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है।

“हम सभी जानते हैं कि किसी भी प्रकार के foreign body या बीमारी से लड़ने के लिए मजबूत प्रतिरक्षा (Immunity) आवश्यक है। कोरोनावायरस मुख्य रूप से फेफड़ों और श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। च्यवनप्राश का एक बड़ा चमचा रोजाना खाने से विशेष रूप से फेफड़ों और श्वसन प्रणाली की प्रतिरक्षा में वृद्धि होती है,

“अमलाकी या आंवला (Emblica Officinalis), guduchi / glioy (Tinospora Cordifolia), नीम (Azadirachta Indica), कुटकी (Picrorhiza Kurica), तुलसी (तुलसी) कुछ ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ हैं जो प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण और संक्रमण को रोकने में सहायक हैं।

“आयुर्वेद में, अच्छा पाचन या मजबूत पाचन अग्नि रोगों से लड़ने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ताजा अदरक का एक टुकड़ा खाएं या अदरक की चाय पीएं। पुदीने की चाय, दालचीनी की चाय, और सौंफ की चाय भी अच्छी हैं,

“आजकल, लोग एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए विभिन्न एहतियाती उपायों का चयन कर रहे हैं और आयुर्वेद को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं। प्रत्येक नथुने में तिल के तेल की दो-तीन बूंदें डालें और इसे सूंघने से न केवल नाक के मार्ग और गले को चिकनाई मिलेगी, बल्कि Foreign Body को दूर रखने के लिए आंतरिक बलगम झिल्ली (mucus membrane)  को भी मजबूत करेगा।

कोविद -19 से लड़ने के लिए गिलोय और तुलसी सहायक हो सकते हैं। अगर किसी में कोरोनोवायरस के लक्षण हैं, तो काली मिर्च, हल्दी और अदरक के साथ गिलोय और तुलसी के ‘कढ़ा’ (काढ़े) का सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए लोगों को प्राणायाम करना चाहिए – गहरी साँस लेना, कपालभाति और अनुलोम विलोम। बच्चों को वायरस से बचाने के सुवर्ण प्राशन संस्कार का उपयोग सबसे अच्छा काम करेगा।

लोगों को केवल अच्छी तरह से पका हुआ भोजन करना चाहिए, सार्वजनिक रूप से थूकने से बचना चाहिए, और निकट संपर्क से बचना चाहिए, यह महत्वपूर्ण है कि लोगों को बीमार होने पर जल्द से जल्द चिकित्सा देखभाल लेनी चाहिए।